गम

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मांगे से तुझसे तेरे गम हमने हंसी तो नहीं मांगी #मांगे थे तुझसे तेरे आसू हमने खुशी तो नहीं मांगी #एक बार प्यार से मना कर दिया हो तो #स्नेह #तुझसे तेरी जिंदगी तो नहीं

_स्नेह🍁🍁

Photo from Sneh

❤💫💫💫❤💫💫💫❤💫💫💫❤ #______ए मेरे हमसफर मैं तेरा हर सफर में साथ दूंगी #____यह वादा है मेरा तू मेरे आखिरी सफर में #स्नेह को #___कंधा दें यह एहसान हो तेरा #__________स्नेह_____🍁🍁

❤💫💫💫❤💫💫💫❤💫💫💫❤ #______ए मेरे हमसफर मैं तेरा हर सफर में साथ दूंगी #____यह वादा है मेरा तू मेरे आखिरी सफर में #स्नेह को #___कंधा दें यह एहसान हो तेरा #__________स्नेह_____🍁🍁

■▪︎▪︎▪︎■▪︎▪︎▪︎■▪︎▪︎▪︎■▪︎▪︎▪︎■▪︎■स्नेह #की #रचनाजब भी रुलाया #स्नेह को अपनों ने रुलायाहर एक शख्स ने नए अंदाज में रुलायाकिसी ने रातों में रुलाया #स्नेह तो किसी ने बातों में #रुलाया #स्नेह को■▪︎▪︎▪︎■▪︎▪︎▪︎■पर हर एक शख्स ने नए अंदाज में रुलाया #स्नेह कोजब भी रुलाया #स्नेह को अपनों ने रुलायारोती रही #स्नेह रातों को कभी सिरहाना गिला ना होने #दिया■▪︎▪︎▪︎■▪︎▪︎▪︎■▪︎▪︎▪︎■अपने अंदर के समंदर को कभी बाहर नहीं आने दियाहर एक शख्स ने नए अंदाज में रुलायाजब भी रुलाया #स्नेह को अपनों ने रुलायारोती रही #स्नेह दिन के उजाले में कापते लबो को हंसी #का नाम देकर■▪︎▪︎▪︎■▪︎▪︎▪︎■भीगी पलकों पर तिनका बदनाम कर केजब भी रुलाया #स्नेह को अपनों ने रुलायाहर एक शख्स ने नए अंदाज में रुलायाजी भर गया इस जिंदगी से कसम इन चलती सांसो कीअब सोने को जी करता है कोई तो उड़ा दो आकर स्नेह #को कफन■▪︎▪︎▪︎■▪︎▪︎▪︎■जब भी रुलाया #स्नेह को अपनों ने रुलायाहर एक शख्स ने नए अंदाज में रुलाया_स्नेह🍁🍁

❤💫💫💫❤💫💫💫❤💫💫💫❤है कौन वह जो रातों को आपके लिए अश्क #बहा ता है गम आपका देख कर अपना गम भूल #_जाता है प्यार आपका पाने के लिए हरेक का❤💫💫💫❤💫💫💫❤💫💫💫❤प्यार ठुकरा ता है #__है कौन #_वो जो रातों को आपके लिए अशक बहता है❤💫💫💫❤💫💫💫❤💫💫💫❤वह अपना दिल ही तो है #स्नेह जो जिंदगी के #_एक मोड़ पर आपके एक अजीज चाहने वाले#_के पास चला जाता हैस्नेह_🍁🍁

❤💫💫💫❤💫💫💫❤💫💫💫❤है कौन वह जो रातों को आपके लिए अश्क #बहा ता है गम आपका देख कर अपना गम भूल #_जाता है प्यार आपका पाने के लिए हरेक का❤💫💫💫❤💫💫💫❤💫💫💫❤प्यार ठुकरा ता है #__है कौन #_वो जो रातों को आपके लिए अशक बहता है❤💫💫💫❤💫💫💫❤💫💫💫❤वह अपना दिल ही तो है #स्नेह जो जिंदगी के #_एक मोड़ पर आपके एक अजीज चाहने वाले#_के पास चला जाता हैस्नेह_🍁🍁

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स्त्री

हां, मैं एक स्त्री हूं, एक देह हूं,
क्या तुमने देखा है मुझे देह से अलग?

पिता को दिखाई देती है मेरी देह एक सामाजिक बोझ,
जो उन्हें उठाना है अपना सर झुकाकर।

मां को दिखाई देती है मेरी देह में अपना डर अपनी चिंता,
भाई मेरी देह को जोड़ लेता है अपने अपमान से।

रिश्ते मेरी देह में ढूंढते हैं अपना स्वार्थ,
बाजार में मेरी देह को बेचा जाता है सामानों के साथ।

घर के बाहर मेरी देह को भोगा जाता है,
स्पर्श से, आंखों से, तानों और फब्तियों से।

संतान उगती है मेरी देह में,
पलती है मेरी देह से और छोड़ देती है मुझे।

मेरी देह से इतर मेरा अस्तित्व
क्या कोई बता सकता है

#____स्नेह ___🍁🍁