दर्द **यह किस दर्द की हूक है** जो पलकों को भिगो गया *जो कभी पलकों पर रहता था** **आज अश्कों में बह गया** 🍁 स्नेह 🍁

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दर्द

**यह किस दर्द की हूक है**
जिसने पलकों को गिला किया
*जो कभी पलकों पर रहता था**
**आज अश्कों में बह गया**
🍁 स्नेह 🍁

दर्द

**यह किस दर्द की हूक है**
जिसने पलकों को गिला किया
*जो कभी पलकों पर रहता था**
**आज अश्कों में बह गया**
🍁 स्नेह 🍁

इश्क-प्रीत-लव

हमें पयार की भाषा नहीं आती अजनबी ,

यू़ आँखों से बातें बनाया न कीजिए ।

ज़रा नादान हैं हम अभी इशक में सनम ,

यूँ सबक इशक के हमें पढा़या न कीजिए ।

न रोका कीजिए राहों में इस तरह ,

यूँ पकड़ के कलाई हमें सताया न कीजिए ।

पतथरों के हैं मौसम काँच के हैं रासते ,

ख़वाबों के इस शहर में ले जाया न कीजिए

हम तुमहारे हैं तो हो जाएंगे तुमहारे ।

यूँ महोबत को सरेआम दिखाया न कीजिए ,

न कीजिए तारीफ़ हर बात में हमारी ।

महफिलों में गज़ले यूँ गाया न कीजिए ,

होता हैं जिक्र साथ तो तुमहारा और मेरा ।

बेतहाशा इस कदर मुसकराया न कीजिए ,

सूना हैं पूछते सब आप से हमारा नाम ।

गुजारिश हैं साहिब किसी को बताया न कीजिए

हम डरते हैं बदनाम हो जाने से ज़रा

मगर गुमनाम भी हमें बताया न कीजिए ….!
🍁 स्नेह 🍁