मेहबूब की याद में रोती हुयी आँखों पर शायरी रात भर रोती रही वो आँखें, जाने किसकी याद में जागती रही वो आँखें। अश्को की अब क्या कीमत लगायी जाये की हर आंसू के गिरते, किसी को पुकारती रही वो आँखें। पलकों पे तस्वीर लिए मेहबूब का, तरसती रही वो आँखें। कहना चाहा बहुत कुछ, पर खामोश रही वो आँखें। उन आँखों को चाहिए था दीदार अपने मेहबूब का जो रूठ के चला गया हैं कही दूर, उसके लौट आने की राह तख्ती रही वो आँखें..।। #__ स्नेह 🍁🍁

ज़िन्दगी का दूसरा नाम इम्तिहान कहते हैं ज़िन्दगी का दूसरा नाम इम्तिहान हैं पर क्यूँ, हर इम्तिहान में कोई न कोई क़ुर्बान हैं अक्सर टूटे सपनो से बिखर जाया करते है वो लोग… जो भी यहां जीवन के सच से रहते अनजान है अब सपने संजोने वाली उन आखों का क्या कसूर नादान दिल की वो तो बस एक छवि, एक पहचान है ज़िन्दगी समझते हैं कुछ लोग चंद पलों को इश्क़ में कहाँ रहता ज़मीन पर कोई इंसान है जब मिलती है सजा ज़िन्दगी में, किसी से दिल लगाने की, लगे बोझ खुदा का वो तोहफा, जिसका नाम जान है ज़िन्दगी कितना भी दे गम, हंस के जी लो यारों मौत भी आज तक कहाँ हुयी किसी पे मेहरबान है जीवन सुख दुःख का एक घूमता चक्र है जो ना समझा ये, वो नादान है, वो नादान है

#____स्नेह ___🍁🍁

सिकवा

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*******शिकवा शिकायत अपनों से की जाती है मिली जो जिंदगी तो खुशी की उम्मीद, की जाती है यहां तो लिपटी ,,है लाश कफन ,,में तो रोने वालों से भी,, उम्मीद,, की जाती___????
#___स्नेह___🍁🍁

●~~~~~~●~~~~~~●~~~~~~●~~~● ””बढ़ती #उम्र बदलते #जमाने का #आलम कुछ ऐसा होगा” ”था बचपन तो अपने ही #सपने से #डरती थी ”’फिर ”अपनी ही #परछाई से #डर गई हुआ यह #आलम #आज की #अपनी ही #रूम में #डर ,,,,#दब #के #रह #गई_____स्नेह____??????🍁🍁

यादें

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#______________क्यूँ चले आते हो?
#___________ज़हन में मेरे ,
#________किसी भी रूप में ,
#_______कोई भी याद बनके,
#______________गीतो के रूप में,कभी
#___________झूमती गेहूँ की बालीयों में,
#_________महकती हवाओं में,
#________भूलना भी चाहूँ तो कैसे?
#______जब मुझे याद नही करते
#______तो मुझे भी याद मत आओ,
#_____जाओ चले जाओ,बहुत दूर

#_________मुझसे,मेरी यादो से ,
#_____स्नेह_______🍁🍁

दर्द

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#____________दिल में है जो दर्द वो किसे बताएं,
#__________हँसते हुए ज़ख्म किसे दिखाएँ.
#_________कहती है ये दुनिया हमे खुशनसीब,
#________मगर नसीब की दास्तान किसे सुनाएँ.
#_______MISS_____YOU_____
#____स्नेह_____🍁🍁

ये केसा नारी सम्मान हैं

मिलकर कुछ हैवानों ने कैसा क़हर ये ढाया है,
फिर से एक निर्दोष बेटी को जिंदा दिया जलाया है।।
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क्या जुर्म किया था उसने जो ये अंजाम पाया है,
मूक बनी सरकार यहाँ पर कोई कानून काम ना आया है।।
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कहाँ गये वो रखवारे जो जिन्होंने नियम बनाया है,
बना के झूठे नियम कायदे नारी को हरदम भरमाया है।।
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करते जुर्म निडर होकर वो जालिम नर हत्यारे है,
देखके एक निर्बल अबला को लग गये नोंचने सारे है।।
😢😢😢😢😢😢😢😢😢😢😢😢😢
कब तक यूँ ही नारी पर ये जुर्म ढाये जायेंगे,
कब तक आखिर अबलाओं के यूँ प्राण जलाये जायेंगे।।
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#justice_for_prinyanka 😢😢😢😢😢

#_____ स्नेह ____🍁🍁